सिक्की कला
मधुबनी की पहचान पेंटिंग से होती है लेकिन ऐसी कई कलाएं है जो अपनी पहचान के लिए बाट जोह रही है ऐसी ही एक कला है सिक्की कला, सिक्की कला से बननेवाली कलाकृतियाँ न केवल खूबसूरत होती है बल्कि गांव घर की महिलाओं को स्वरोजगार देने का विकल्प है | मिथिलाचल की गरीबी का सौन्दर्य है और लोगों की कठिन परिस्थितियों में रहने वाली जीवनशैली से प्रमुखता से उभर कर निकला |गरीबी और कठिन परिस्थितियों में कला किस प्रकार जन्म लेती है और पहचान बनाती है सिक्की कला इसका प्रतीक हैI सिक्की कला का मुख्य आधार है खर की एक प्रजाति जिसे सिक्की कहते हैं. सिक्की को काटकर सुखाकर फिर इसे कलाकारों द्वारा जीवंत शक्ल दिया जाता है | सिक्की घास से घरेलु उपयोग की सामान जैसे डलिया, डोलची अनेक सामान बनाये जाते हैं जो देखने में बड़े ही सुन्दर और मनमोहक लगते हैं | शहरों में तो बड़े बड़े घरों मे सजावट के सामान के रुप में सिक्की घास द्वारा निर्मित वस्तुएं आलमारियों एवं दीवारों पर इस तरह से सजाये जाते है कि घर में प्रवेश करते ही आने वाले मेहमानो का ध्यान उस ओर चला जाता है | सिक्की कला मिथिला की गरीबी का सौन्दर्य है | मिथिलाचल ...